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15 एक दिन की बात है नाटक ने की दर्शकों की आंखे नम

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जिला प्रशासन तथा भाषा विभाग द्वारा शुरू रंगनाथ मंच की प्रस्तुतियों की श्रृंखला

नाटक में जहां बेटी और बेटे के भेदभाव को दर्शाया गया, वहीं बुजुर्गों के साथ होने वाले अन्याय की व्यथा को भी बयां किया गया

जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर

जिला के कलामंच प्रेमियों को उचित मंच देने के उद्ेश्य से जिला प्रशासन तथा भाषा एवं संस्कृती विभाग द्वारा हर माह को शुरू किए गए रंगनाथ मंच की प्रस्तुतियों की श्रृंखला में उड़ान थियेटर गु्रप बिलासपुर द्वारा 15 दिन की बात है का मंचन किया गया। नाटक की प्रस्तुती में बेटी है अनमोल का संदेश प्रभावी ढंग से संप्रेषित करने के लिए बुना गया तानाबाना दर्शकों की आंखों को नम करने में सफल रहा। नाटक में बताया गया कि एक बूढ़ा व्यक्ति मंच पर बैठा है और हाथों में तस्वीर लिए रो रहा है। तभी अचानक सामने रखे फोन की घंटी बजती है और जैसे ही व्यक्ति फोन उठाया है, वैसे ही मंच पर अंधेरा हो जाता है। मौका था 15 एक दिन की बात है नाटक के मंचन का। जिसे उड़ान थियेटर ग्रुप बिलासपुर के कलाकारों द्वारा बखूबी तरीके से प्रस्तुत किया गया।
नाटक में जहां बेटी और बेटे के भेदभाव को दर्शाया गया, वहीं बुजुर्गों के साथ होने वाले अन्याय की व्यथा को भी बयां किया गया। रंगकर्मी अभिषेक सोनी द्वारा निर्देशित इस नाटक में बेटी और बाप के स्नेह व मर्मस्पृशी दर्द को देखकर भाषा विभाग के आडिटोरियम में बैठे प्रत्येक दर्शक की आंखे आंसुओं से भर आई। रंगकर्मी अभिषेक सोनी, शिवांगी रघु और नवीन सोनी ने अपने शानदार सजीव अभिनय के बल पर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। वहीं, अभिषेक डोगरा, निशांत रघु, अंकिता शर्मा, गौरी शर्मा और पंकज कौंडल

ने विभिन्न किरदार निभाकर अपनी प्रतिभा का प्रभावी प्रदर्शन किया जबकि आसिफ और अमन त्रिवेदी ने नेपथ्य का कार्य वाखुबी संभाला।
उपायुक्त विवेक भाटिया ने रंगनाथ मंच के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि बिलासपुर के उभरते व स्थापित प्रतिभाशाली कलाकारों को अपने हुनर को प्रदर्शित करने के लिए रंगनाथ मंच एक सेतु का कार्य कर रहा है। कलाकारों को अपनी कला दर्शाने के लिए निशुल्क प्रेक्षा गृह, विद्युत इत्यादि की सुविधाए उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंनें कहा कि कलाकारों और भी सहुलियतें उपलब्ध करवानें के प्रयास निरन्तर जारी रहेगंे ताकि रंगनाथ मंच के माध्यम से दर्शकों को बेहतर प्रस्तुतियां अवलोकनार्थ मिल सके और जिला की लोक सास्कृतिक विरासत का सम्वर्धन, प्रचार व प्रसार हो सके।
इस अवसर पर एसडीएम प्रियंका वर्मा ने नाटक की प्रसंशा करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रस्तुतियों से जहां समाज को एक यसार्थक संदेश जाता है वहीं कलाकारों को एक ऐसा मंच मिलता है जिसके माध्यम से वे सामाजिक कुरीतियों व व्यथाओं को प्रर्दशित करके लोगों को जागरूक करने की भूमिका का निर्वहन करते हैं। सहायक आयुक्त पूजा चैहान ने नाटक के पश्चात अपने उद्गार प्रकट करते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन द्वारा की गई पहल का प्रतिफल है कि दर्शकों को ना केवल अच्छे नाटक ही देखने को मिल रहे हैं बल्कि समाज में घटित हो रही घटनाओं का सजीव चित्रण भी देखने को मिल रहा है। पीओ डीआरडीए संजीत सिंह ने कहा कि इस प्रकार के सार्थक नाटक की प्रस्तुतियों से लोगों को रूबरू करवाने के लिए प्रयास किए जाएंगे कि सरस मेले में भी नाटकों के मंचन करवाए जाएं। रंगप्रेमी एवं डा0 शाहिद ने नाटक की सराहना करते हुए कहा कि नाटक का स्तर गेयटी थियेटर शिमला और टैगोर थियेटर चंडीगड़ में मंचित होने वाले नाटकों से भी कई गुणा बेहतर रहा। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन के प्रयास फलीभूत हुए हैं इसके लिए उन्होंने प्रशासन को साधुवाद दिया।
इस अवसर पर एडीएम प्रियंका वर्मा, सहायक आयुक्त उपायुक्त पुजा चैहान, पीओ डीआरडीए संजीत सिंह, वीडीओ सदर गौरव धीमान, श्रम अधिकारी प्यारे लाल साहु, कार्यकारी अधिकारी उर्वशी वालिया, जिला भाषा अधिकारी नीलम चन्देल, सुशील पुण्डीर, रत्न निर्झर, अरूण डोगरा, अनुप कुमार के अतिरिक्त जिला भर के कलाप्रेमी मौजुद रहे।

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