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हिमाचल प्रदेश में स्कूलों में ग्रेडिंग सिस्टम खत्म

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पांचवीं और आठवीं के छात्र कम नंबर आने पर होंगे पास-फेल

आरटीई नियमों में होगा संशोधन

जनवक्ता डेस्क बिलासपुर

हिमाचल प्रदेश में सरकारी शिक्षा में सुधार करने के लिए अब आरटीई के नियमों में बदलाव होगा। केंद्र सरकार ने आरटीई के नियमों में बदलाव कर पांचवीं और आठवीं के छात्रों को कम नंबर लाने पर फेल करने के आदेश दिए हैं। पांचवीं और आठवीं के छात्रों ने कम ग्रेड लाए, तो ऐसे मेें उन्हें फेल किया जाएगा। भारत सरकार ने आरटीई के नियमों में संशोधन कर राज्य में भी इसमें बदलाव करने को कहा है। बता दें कि वर्तमान में हिमाचल में 2009 से लागू आरटीई के नियमों के तहत छात्रों को कक्षा पहली से आठवीं तक बिना पढ़े भी पास कर दिया जाता है। सरकार व आरटीई के नियमों से सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर इसी वजह से गिरता जा रहा है। अब जब भारत सरकार ने आरटीई के नियमों में बदलाव कर सरकारी शिक्षा में गुणवत्ता लाने का फैसला लिया है, तो इससे प्रदेश के सरकारी स्कूलों के परिणाम बेहतर

आएंगे। बता दें कि हिमाचल में वर्ष 2009 में जब आरटीई नियम लागू हुआ था, तो उस समय कई लोगों द्वारा इसका विरोध भी किया गया। 2010 में कांग्रेस के कार्यकाल में दोनों राजनीतिक पार्टियों की सहमति से आरटीई के नियम में बदलाव कर कमजोर छात्रों को रिवर्समेंट देने पर सहमति बन गई थी। भारत सरकार से मंजूरी न मिलने से सालों से विधानसभा में पारित होने के बाद भी आरटीई के नए नियम को प्रदेश में लागू नहीं किया जा सका था। आज प्रदेश में स्कूलों की हालत ऐसी हो गई है कि सरकारी शिक्षा लेने वाले छात्र आज बहुत कम ऊंचाइयों तक पहुंच रहे हैं। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पांचवीं के छात्रों को भी सही ढंग से अंकों का ज्ञान और जमा, घटाने के सवाल भी नहीं आ पाते। हिमाचल में बोर्ड और अन्य परीक्षाओं के रिजल्ट का स्तर भी गिरता ही जा रहा है। राज्य सरकार ने भारत सरकार के निर्देशों के बाद आरटीई के नियमों में संशोधन का फैसला लेकर अगले सत्र से छात्रों को फेल करने का प्रस्ताव तैयार करना शुरू कर दिया है।

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