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वार्षिक पारितोषिक वितरण दिवस सिंहावलोकन करने का समय: धूमल

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पूर्व मुख्यमंत्री ने जन्दड़ू वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में होनहारों को किया पुरुष्कृत

जनवक्ता ब्यूरो हमीरपुर
वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह का दिन वास्तव सिंहावलोकन करने का समय होता है कि बीते वर्ष में हमने क्या किया, क्या पाया क्या खोया, हमने अपना जीवन कितना आगे बढ़ाया, हम सही दिशा में जा रहे हैं या गलत दिशा में| पूर्व मुख्यमंत्री प्रो० प्रेम कुमार धूमल ने सुजानपुर के जन्दड़ू में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में उपस्थित बच्चों, अध्यापकों को सम्बोधित करते हुए यह बात कही| उन्होंने कहा कि बच्चों और अध्यापकों सभी को इस दिन का बेसब्री से इन्तजार रहता है| इस मौके पर होनहार छात्रों को पुरुष्कार बांटते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि जो बच्चे इस बार पुरुष्कार नहीं प्राप्त कर पायें हैं उनको अगले वर्ष के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए| उन्होंने इस अवसर पर बच्चों द्वारा दी गयी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आनन्द लिया|
प्रो० धूमल ने जन्दड़ू क्षेत्र से जुड़ी स्मृतियों को उपस्थित लोगों के साथ साझा करते हुए कहा कि 1989 में पहली बार वह स्व० लश्करी राम जी के साथ जन्दरू आये थे| तब यहाँ पहुंचना बहुत कठिन था| सीमेंट की बोरी तब तक 40 रूपए की मिलती थी लेकिन जन्दरू तक पहुँचाने का खर्चा 50 रूपये आता था| सांसद बनने के बाद वह फिर जब जन्दड़ू आये तो स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि जब भी चुनाव आते हैं तब जन्दड़ू तक सड़क मार्ग बनाने को चुना बिछा दिया जाता है लेकिन चुनावों के बाद कुछ नहीं होता| प्रो० धूमल ने कहा कि 1998 में मौका मिला और वह मुख्यमंत्री बने और सबसे पहले लगदेवी से न केवल जन्दड़ू तक सड़क बनवाई बल्कि लोगों के बिना मांगे रात को ढाई-ढाई बजे तक काम चलवा कर इस सड़क को बीड़ बगेह्ड़ा तक पहुंचाया| इस क्षेत्र के लोगों के जीवनयापन बहुत बड़ा परिवर्तन लाया था|
प्रो० धूमल ने उपस्थित लोगों को सचेत करते हुए कहा कि जो कौम आया राष्ट्र अपने इतिहास

को भूल जाती है उस पर संकट आता है| अंग्रेजों ने हमें हमारा गौरवमयी इतिहास भुला कर वर्षों हम पर राज किया था| हमारे संस्कारों, परम्पराओं, रीती रिवाजों को दकियानूसी बताया गया| हमारी श्रेष्ठता हमें भुला कर हमने यह मानने पर विवश कर दिया गया कि हमारे पास गंवाने के लिए कुछ भी नहीं है| हमारा आत्मविश्वास तोड़ दिया गया| हम पश्चिमी सोच को श्रेष्ठ मानने लग गये थे| और आज वही हमारी परम्पराएं, विचार, संस्कृति, रीति रिवाज सब पर पश्चिम देश रिसर्च कर हमें बता रहे हैं कि ऐसा करो| योग को योगा बना दिया, वेद को वेदा बना दिया| हमारा जो गौरवमयी इतिहास और संस्कृति हमें भुला दी गयी थी आज वही सारी दुनिया को सही लग रही है|
प्रो० धूमल ने कहा कि पश्चिमी सोच के प्रभाव में आकर आज हम लोग भी समाजिक जीवन भूलते जा रहे हैं| अध्यापक कक्षा में पढ़ाते हैं की मानव समाजिक प्राणी है| लेकिन समाजिक दायित्वों को आज कितना निभाया जा रहा है| पुराने समय में सयुन्क्त परिवार होते थे, गाँव के लोग अधिकतर शाम को इकट्ठे होकर चर्चा करते थे, परिवार में बड़े बजुर्ग बच्चों को प्रेरणादायक कहानियाँ, प्रसंग इत्यादि सुनाते थे, क्षेत्र के प्रबुद्ध लोग बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखते थे| लेकिन आज बच्चे को स्कूल भेज कर अपनी जिम्मेवारी पूरी समझ लेते हैं| आस-पड़ोस में चाहे बच्चे चाहे जो मर्जी कर रहे हों, हम यह सोच कर आँखें बंद कर लेते हैं कि हमारा बच्चा नहीं है| असमाजिक तत्व की करतूतों को यह सोच कर नजरंदाज कर दिया जा है कि हमारे परिवार से कोई इससे प्रभावित नहीं हो रहा है| यहीं से हमारे समाज का पतन शुरू हुआ है| नन्हे मुन्ने बच्चे नशे की चपेट में हैं| सब को चौकस हो कर अपना समाजिक कर्तव्य निभाने की जरुरत है तभी युवा पीढ़ी सुरक्षित रह पाएगी| और देश भी तभी सुरक्षित रह पायेगा|
इस अवसर पर मण्डल अध्यक्ष कैप्टन रणजीत सिंह, स्कुल के प्रधानाचार्य ओंकार चंद, पंचायत प्रधान प्रवीन सिंह लगवाल, वीरेंद्र ठाकुर, सुमन चोहान सहित स्कूल प्रबन्धन, अध्यापक वर्ग, विभिन्न पंचायतों के प्रतिनिधि, महिला मंडलों की प्रधान और पदाधिकारी, स्कूली बच्चे, अभिभावक और अन्य स्थानीय लोग उपस्थित थे|

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