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मेरी केरल यात्रा…….संस्मरण….. एडवोकेट प्रवेश चंदेल

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जनवक्ता का प्रयास है कि बुद्धिजीवियों के आलेख दिए जाएं और उनकी कलम से पाठकों को भी अवगत करवाया जाए। इसी कड़ी में हम आज एडवोकेट प्रवेश चंदेल की केरल यात्रा का वृतांत उन ही की कलम से प्रस्तुत कर रहे हैं। यह विचार पूर्ण रूप से प्रवेश चंदेल जी के हैं और एज इट इज ही पब्लिश किये गए हैं। जनवक्ता का इनसे कोई लेना देना नहीं है। इस कालम के लिए पाठक अपनी यात्राओं का वृतांत भेज सकते हैं। अगर प्रकाशन योग्य हुए तो अवश्य स्थान मिलेगा। आप अपने फोटो के साथ मेल कर दें।
मेल आईडी है janwakata@gmail.com
अपनी राय या सुझाव भी मेल कर सकते हैं।
………..मुख्य सम्पादक

केरल के लोगों का जीवन स्तर समझने का अच्छा अवसर था : प्रवेश चंदेल

पिछले कल ही मैं केरल से अपनी यात्रा करके वापिस लौटा हूँ ।मेरे लिए ये यात्रा केरल ,केरल की संस्कृति, केरल लोगों, वहाँ विभिन्न धर्मों का समाज में योगदान, केरल के लोगों का जीवन स्तर समझने का अच्छा अवसर था बीच में सबरीमाला विवाद भी चला लाखों महिलाएं सड़कों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करवाने के लिए केरल की सड़कों पर उतरीं मेरे लिए यह भी एक ऐतिहासिक घटना थी ।परंतु मेरे लिए सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक था केरल जिसके पास जनसंख्या के हिसाब से कम संसाधन फिर भी मानव मूल्य सूचकांक में हमारे जैसे राज्यों से केरल बहुत ऊपर है ।मेरा मानना है कि विभिन्न धर्मों ने भी केरल को सँवार कर उसकी एक अलग पहचान बनाई है ।मुझे केरल के कडंगलूर (त्रिशूर) की chraman Jumma Masjid में जाने का मौका मिला ।केरल में cheraman Perumal केरल के एक रियासत कोडंगलूर के राजा हुए । जिन्होंने इस्लाम स्वीकार कर लिया और मक्का भी गए ।उन्होंने अपने जाने से कुछ सन्देश अपने सिपहसलारों को लिख कर दिए ।बाद में वो मालिक इब्न दीनार और उसके कुछ अरब व्यपारियो के हाथ लगे जिन्होंने उन खतों की इच्छानुसार वहाँ मस्जिद का निर्माण करवाया ।आरकेलोजिकल विभाग के अनुसार यह मस्जिद1000 वर्षों से अधिक पुरानी है जिससे यह भी सिद्ध होता है भारत में इस्लाम व अरब के साथ सम्बन्ध बहुत पुराना है परन्तु आजकल आरएसएस के लोग इस्लाम को बाबर के भारत आने के साथ जोड़ते है जबकि की यहाँ पहले से ही शासक इब्राहिम लोदी के बाबर की लडाई हुई जो कि मुस्लिम था और बाबर से पहले यहां का शासक था । दूसरा मैंने केरल के दो इतिहासिक चर्च देखे एक रोमन कैथोलिक और दूसरा लैटिन कैथोलिक के साथ सम्बन्ध बताते हैं ।इसके इलावा कई इतिहासिक मंदिर केरल में हैं जिनके पास अकूत जमीनें सम्पत्ति है।परंतु इस्लाम और अरब के साथ व्यपार के सम्बंध इतने गहरे हैं कि आजकल लगभग केरल हर घर से हर धर्म के लोग अपनी रोजी रोटी कमाने अरब क्षेत्र के देशों जाते और हमारे देश के लिए डॉलर अर्जित करते है ।चर्च ने आधुनिक शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान दिया है जिसके कारण केरल बहुत से लोग यूरोप या अमेरिका में सेटल हो गए है या वहां काम कर रहें है । मुझे कोडंगलोर के ही प्रसिद्ध भद्रकाली मंदिर में जाने मौका मिला जहाँ पर मर्दों को कमीज उतार कर ही अंदर जाने दिया जाता है। पुराने मंदिरों को देखकर ऐसा लगता कि किसी समय में बौद्ध मठ रहे है जिन्हें शंकराचार्य व उनके अनुयायियों ने नष्ट कर दिया या फिर मंदिरों में तबदील कर दिया जिसे इतिहास में पुनर्जागरण युग कहा जाता है ।लोगों की धर्म में आस्था है हालांकि केरल

में दलितों व पिछड़ों को मंदिरों के अंदर प्रवेश के लिए लम्बी लड़ाई व सामाजिक आंदोलन चलाने पड़े । केरल को केरल बनाने व आपसी भाईचारा बनाने व लोकतंत्र के माध्यम से दुनिया के पहली कम्युनिस्ट व गैर कांग्रसी सरकार बनाने का श्रेय बेशक कम्युनिस्टो को जाता है ।केरल में भूमि सुधार , सार्वजनिक वितरण प्रणाली, शतप्रतिशत शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, दलितों को मंदिरों में प्रवेश व सरकारी मंदिरो में दलित पुजारियों की नियुक्ति, पर्यावर्णीय दृष्टि से विकास,साम्प्रदायिक सदभाव ,स्वच्छ व निर्मल केरल होने का श्रेय बेशक तौर पर शासक वामपंथ को जाता है ।आरएसएस केरल में धर्म की आड़ में सबरीमाला मंदिर के मुद्दे पर लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करके ,लव जिहाद जैसे शब्दों से भाजपा के राजनैतिक फायदे की तलाश में दंगा करवाने पर जुटा है।धर्म की आड़ में कम्युनिस्ट पार्टियों के कार्यलयों पर हमले करवा रहा है पर निश्चित तौर पर केरल के महान लोग जो सर्वे भवन्तु सुखिनः, जो वसुदैव कटुम्बकम की बात करने वाले लोग हैं वे निश्चित तौर पर महिलाओं को उनका हक दिलवाएंगे और इन फासिस्ट शक्तियों को हराएंगे ।केरल में बहुत सी चीजें देखने और सीखने को मिली केरल के लोग पेडों प्रकृति से बहुत प्यार करते हैं इसीलिये हर घर के पीछे बहुत से फलदार पेड़ होते हैं जिनकी वजह घर बड़ा सुंदर ,आकर्षक और ठंडे रहते है । केरल में गर्म मसाले उगते हैं जिनकी वजह से अरब और यूरोपियन व्यपार करने यहाँ आए ।बेशक यह कमाल भी केरल ही कर सकता है भयंकर बाढ़ और केंद्र से प्रयाप्त सहायता ना मिलने वावजूद फिर खड़े होने और आगे बढ़ने का हौसला भी केरल में ही है ।केरल जैसे छोटे राज्य में पांच हवाई अड्डे बन गए हैं जहां देश व विदेश को नियमित उड़ाने जाती है ।बाकी बहुत सी बातें जो केरल में सीखी या देखी वो भी केरल समृद्ध संस्कृति को दर्शाती है ।यहां ज्युज स्ट्रीट भी है और यहाँ की वाटर ट्रांसपोर्ट भी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जो कई जगह गाड़ियों को बड़े जहाजों डाल कर एक जगह से दूसरी जगह छोड़ते है। आधुनिकता के इस दौर में केरल भी पीछे नहीं है यहाँ एशिया का सबसे बड़ा मॉल लुलु कोच्ची में है जिसे देखने का भी मौका मिला ।केरल में व झरने भरपूर मात्रा में है मुझे त्रिशूर के अदिरपल्ली फॉल देखने का मौका मिला जहाँ प्रसिद्ध फ़िल्म बाहुबली की भी शूटिंग हुई थी ।मैंने केरल में नई आशा की किरण भी देखी एक तरफ देश मेंअंध धार्मिकता का जहर फैलाया जा रहा है वहीं पर केरल की युवा शिक्षित लड़के लड़कियां अंतरजातीय, हिन्दू मुस्लिम से मुस्लिम क्रिशचन से क्रिशचन हिन्दू से करते देखे जबकि परिवारों एक एक बच्चा होने के बावजूद वे स्वेच्छा शादियां कर रहे हैं और शादी के बाद भी अपना धर्म भी नहीं बदलते हैं मेरे ग्रुप में जहां मैं ठहरा था कई मुसलिम लड़कियां थी जिन्होंने हिन्दू लड़कों से शादियां की थी कुछ हिन्दू लड़कियां भी थी जिन्होंने मुस्लिम लड़कों से शादियां की थी कई लड़के और लड़कियां मुस्लिम क्रिशचन, क्रिशचन हिन्दू भी थे जिन्होंने आपस में शादियां की थी या करने वाले थे और उन्हें समाज स्वीकार भी कर रहा था उन्होंने मुझे कि पूरा ग्रुप जब कालेज विश्विद्यालय में पढ़ते थे उसी समय हम सबने तय किया था कि हम सब समाज के हिस्सों को जोड़ने की कोशिश करेंगे और उन्होंने वो किया भी और उसमें कामयाब भी हो रहे हैं ।इसके इलावा महत्वपूर्ण समुद्री बीच केरल में है ।केरल के लोग हंसमुख व बहुत आतिथ्य सत्कार वाले है यह यात्रा हमेशा के लिए एक सुखद एहसास रहेगा।

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