Home national खेल प्रतिभाओं को सम्मानित की बजाय किया जा रहा अपमानित

खेल प्रतिभाओं को सम्मानित की बजाय किया जा रहा अपमानित

116
0
SHARE

विश्व स्तरीय मैडल जीतने वाले खिलाडी को नौकरी से किया रुखस्त

हिमाचल प्रदेश सरकार का यह कैसा तुगलकी फरमान

जनवक्ता ब्यूरो, बद्दी
वह देश के लिए खेलना चाहता है ताकि विश्व भर में हिमाचल का नाम हिमालय की तरह ऊंचा हो सके। उसने मिटा दी अपनी हस्ती देवभूमि की पहचान के लिए और बदले में मांगा कुछ भी नहीं। सर्वजन हिताय की बात करने वाली प्रदेश सरकार ने उसका सपना चकनाचूर करने का पूरी पुलिंदा बांध दिया और एक होनहार अंतरराष्ट्रीय खिलाडी को उसकी मामूली सी कांस्टेबल की नौकरी से निलंबित कर अनोखा संदेश भारत व विश्व को दिया है। इस खिलाडी को जहां सरकार को पलकों पर बिठाना चाहिए था वहीं अब वो उस अंधेरे की ओर जा चुका है जहां से उसका सब कुछ दाव पर लगा है। उसने सरकार से पैसे नहीं मांगे सिर्फ यही कहा कि बिना वेतन छुट्टी दे दो लेकिन वो भी जयराम सरकार को नागवार गुजरी और एक दिन उसकी नौकरी पर ही बन पाई और उसके लिए पुलिस विभाग के दरवाजे सदा के लिए बंद कर दिए गए। एक तो वतन पर मर मिटने के साथ भारत का नाम रोशन की ऊंची उ मीदें वहीं सरकार का दिया अनोखा तोहफा अंतरराष्ट्रीय खिलाडी अनिल मैहता को ताऊम्र गम के समंदर में डूबो गया। ऐसी ही एक लंबी व दर्दनाक कहानी है दून विस के मंधाला के युवा थाई बाक्सिंग व किक बाक्सिंग खिलाडी अनिल मैहता की जो कि बददी पुलिस में कास्टेबल के पद पर तैनात है। प्रैस क्लब बददी में आकर जहां उसने जयराम सरकार की खेल योजनाओं पर कई सवाल उठाए वहीं अपने कैरियर को लेकिर चिंतित दिखे अनिल मैहता ने अपने लिए इंसाफ भी मांगा। उसने बताया कि उसकी रुचि थाई बाक्सिंग व किक बाक्सिंग में हुई तो उसने हिमाचल से लेकर विदेशों तक लंबा सफर तय किया और कई मैडल व तगमे अपने नाम किए। जब उसकी प्रैक्टिस बहुत ज्यादा बढ गई और विदेश आना जाना लगा तो उसने विद आऊट पे अवकाश ले लिया और अपने मिशन पर अर्जुन की तरह डटा रहा। जब सरकार ने उसकी कद्र नहीं की तो भी अनिल मैहता ने हि मत नहीं हारी और हर जगह न्याय व इंसाफ की गुहार लगाई लेकिन हर जगह से निराशा मिली। सीएम जयराम से सीधा मिला तो वह बहुत प्रसन्न हुए हिमाचली हीरे से मिलकर और उन्होने उसकी विदाऊट पे जारी करने का आश्वासन दिया। लेकिन हैरानी की बात तो तब हुई जब गृह मंत्रालय के कर्मचारियों ने उसकी छुटटी की फाईल ही गुम कर दी। अनिल डी.जी.पी से भी मिला लेकिन वहां से भी इस खिलाडी को आश्वासन ही मिला।

कैसे हुई शुरुआत

अनिल मैहता मई 2015 में थाईलैंड गए जहां उन्होने थाई बाक्सिंग व किक बाक्सिंग की 7 महीने प्रशिक्षण लिया और वहां गोल्ड मैडल जीता और ये गेम ओलंपिक से संबधित है। उसके बाद 2016 में अनिल मैहता मलेशिया गए जहां उन्होने टाईटल बैल्ट जीता और प्रथम भारतीय खिलाडी बने। इसके बाद थाईलैंड में प्रो फुट फाईट लडी

व बाद में एशिया में हुई वल्र्ड चैंपियनशिप में कर्वाटर फाईनल में मामूली मुकाबले में हार गए। 2017 में पुन: थाईलैंड में अपने खर्च पर प्रशिक्षण लिया और अब तक चार प्रौफेशनल फाईट लडी जिसमें से तीन जीती और एक हारी।

क्या है थाई बाक्सिंग

थाई बाक्सिंग व किक बाक्सिंग आम बाक्सिंग से बहुत ज्यादा खतरनाक है। इसमें विरोधी खिलाडी शरीर के किसी भी अंग पर मार कर सकता है। इसमें कोई नियम कानून नही है बल्कि एक दूसरे पर हावी होना ही जीत माना जाता है। सामने वाला खिलाडी मुंह से लेकर पैर तक कहीं भी घात कर सकता है फिर चाहे आपकी मौत ही क्यों न हो जाए आप व आपका परिवार कोई दावा नहीं कर सकता।

अब तक हुई जीत

जून जुलाई 2018 में अनिल ने थाईलैंड में पांच फाईट लडी जिमसें से तीन पर कब्जा किया। और मु-थाई में पहले भारतीय बने जिसने इन्होने चैंपियशिप में क्लेम किया। इसी वर्ष चाईना में हुई थाई बाक्सिंग में अनिल मामूली अंतर से कर्वाटर फाईनल में मात खा गए। इस गेम में 15 मिनट में पांच खतरनाक राऊंड से गुजरना पडा है और जरा सी चूक हुई तो जान भी जा सकती है। अब तक उन्होने 21 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले लडे जिसमें से 14 में धमाकेदार जीत दर्ज किए और 6 में उनको हार का सामना देखना पडा।

क्या चाहता है अनिल

इस खिलाडी ने कहा कि अब तक उसके संघर्ष में उसको सरकार की ओर से रत्ती भर भी मदद नहीं मिली और वह सिर्फ इतना चाहता है कि उसकी विदआऊट लीव सरकार जारी रखे और उसके नौकरी से बर्खास्त करने के आदेश वापिस ले। उन्होने कहा कि सरकार ऐसे लोगों को पांच साल का अवकाश दे चुकी है जो कि बिजनेस के लिए मांगते है जबकि मैं तो देश के लिए खेलता हूं तो मेरे साथ यह नाइंसाफी क्यों

दोस्त आ रहे हैं काम

अब तक विदेशों में भारत का नाम रोशन कर चुके हिमाचल पुलिस के सिपाही अनिल मैहता के आने जाने सहित अन्य खर्च उसके यार दोस्त ही कर रहे हैं । आज अगर यह दोस्त न होते तो वह दुनिया के दूसरे कोनों में जाकर जंग न लड पाता। बीबीएन के पूर्व खिलाडी राजीव मैहता स्वयं व अपने परिचितों से मिलकर अनिल के आने जाने व अन्य जरुरतों को पूरा करवा रहे हैं।

सीएम जयराम व खेल मंत्री गोविंद से है आस

प्रदेश सरकार के निराशापूर्ण रवैये से आहत खिलाडी अनिल मैहता ने कहा कि उसको अब प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर व खेल मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर से ही आस है कि वो उसकी पुकार सुनेंगे और उसकी नौकरी बहाली के साथ साथ उसको प्रोत्साहन भी देंगे।

2021 पर है अंतिम नजर

अनिल ने कहा कि चूंकि ऐसी खेलों में किसी भी खिलाडी का कैरियर चार पांच साल से ज्यादा नहीं होता इसलिए उसकी नजर अब 2021 में यूएसए में होने वाली वल्र्ड गेम पर है। अगर वो यह जीत जाता है तो विश्व में हमारा पूरा डंका बजेगा। हिमाचल में इसकी प्रैक्टिस के लिए कोई स्थान न होने से उसको दिल्ली व अन्य राज्यों में जाना पडता है जबकि राज्य सरकार दलील देती है कि यह खेल प्रांत में मान्यता प्राप्त नहीं है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here