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कौन हो तुम? राम या रावण!

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जनवक्ता परिवार की ओर से आप सभी को महापर्व दशहरा की शुभकामनाएं

तुम्हारे अन्दर राम भी हैं रावण भी

कृष्ण भी और कंस भी

अच्छाई भी और बुराई भी

तुम्हारे भीतर ही इन दोनों का द्वंद चलता रहता है….
राम कहता है जागो अपने लक्ष्य की ओर बढ़ो…. रावण कहता है…अभी टाइम ही क्या हुआ है सोते रहो…
कृष्ण कहता है समय अमूल्य है इसे बर्बाद मत करो….कंस कहता है….थोड़ा और फेसबुक देख लो….
अच्छाई कहती है सिर्फ अपने नहीं सबके बारे में सोचो …. बुराई कहती है….अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता….
इनकी लड़ाई हर पल चलती रहती है… शुरू में दोनों के पास बराबर पॉवर होती है लेकिन धीरे-धीरे ये पॉवर- इक्विलिब्रियम बिगड़ने लगता है.
इन दोनों में से एक अधिक शक्तिशाली होने लगता है दूसरे को दबाने लगता है…. उस पर हावी होने लगता है….. डॉमिनेट करने लगता है…. और एक दिन वो इतना हावी हो जाता है कि दूसरे वाले की उसके सामने कोई हैसियत ही

नहीं रह जाती.
हावी राम भी हो सकता है रावण भी…. कृष्ण भी और कंस भी…. अच्छाई भी और बुराई भी !
पर पता है… हावी कौन होता ?
वो जिसे तुम चाहते हो!
जिसे तुम्हारी शह मिलती है…. जिसे तुम सपोर्ट करते हो.
तुम अच्छी संगत करते हो… राम की पॉवर बढती है…
तुम बुरी संगत करते हो… रावण स्ट्रॉन्ग हो जाता है…
तुम कामयाबी के लिए कठोर परिश्रम करते हो…. कृष्ण को बल मिलता है…
तुम आलस में पड़े रहते हो… कंस शक्तिशाली बन जाता है…
तुम माता-पिता गुरु का आदर करते हो … अच्छाई को ताकत मिलती है…
तुम उनका निरादर करते हो… अपमान करते हो… बुराई को बल मिलता है….
तुम और अधिक वो बनते जाते जो जिस तरह का तुम काम करते हो….
अपने भीतर चल रहे इस द्वंद में तुम किसकी जीत चाहते ?
उस रावण की जिसके जीतने से तुम्हारी हार होगी या उस राम की जिसके जीतने से तुम्हे विजय होगी.
जिताओ अपने अन्दर के राम को… क्योंकि इस दुनिया में रावणों की कमी नहीं…. कमी राम की है….
बनाओ खुद को राम और भागवान श्री राम की तरह अपने अन्दर की और अपने बाहर की दुनिया से बुराई रुपी रावण का अंत कर दो!

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