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काव्य संग्रह अंजुरी भर आस का हुआ विमोचन

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सुप्रसिद्ध कवियित्री प्रोमिला भारद्वाज का दूसरा काव्य संग्रह लोकार्पित


इस अवसर पर प्रोमिला को मिठाई खिलाती साहित्यकार व मंच संचालक संतोष गर्ग , साथ में हैं हिमाचल भाषा अकादमी के सचिव डा कर्मसिंह

जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
बिलासपुर में जिला लेखक संघ की गतिविधियां काफी सक्रिय है और अब तक संघ द्वारा अपने 25 सदस्यों की पुस्तकों का प्रकाशन किया जा चुका है। ऐसे में ही एक सुप्रसिद्ध कवित्री प्रोमिला भारद्वाज की पुस्तक काव्य संग्रह अंजुरी भर आस का विमोचन भी एक समारोह में किया गया। यह विमोचन पूर्व आईपीएस अधिकारी आई. डी. भण्डारी तथा बिलासपुर लेखक संघ के मुख्य संरक्षक कर्नल जसवंत सिंह चंदेल के कर कमलों द्वारा हुआ। गौर रहे कि प्रोमिला भारद्वाज बिलासपुर में ही जिला उद्योग केंद्र में महा प्रबंधक के पद पर सेवाएं दे रही है। इससे पहले भी उनका एक काव्य संग्रह स्वर लहरियां प्रकाशित हो चुका है। इसके अलावा देश अथवा प्रदेश की विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं समाचार पत्रों में उनकी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती है। इसके अलावा कई राज्य स्तरीय कभी गोष्ठियों में उनका सक्रिय भाग लेती रहती है। बीए ऑनर्स व एम ए अंग्रेजी साहित्य में पंजाब विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल करने वाली प्रोमिला भारद्वाज कविता गीत गजल और लघु कथाएं तो लिखती है

लेकिन इनकी कुछ कविताएं अंग्रेजी में भी प्रकाशित हुई है। दूरदर्शन से भी काव्य पाठ का प्रसारण इन द्वारा किया गया है। विभिन्न राज्यों की साहित्यिक संस्था द्वारा 108 सम्मान पत्र इन्हें प्राप्त हुए हैं और महाराष्ट्र में आयोजित राष्ट्रीय आइडियल कविता स्पर्धा वर्ष 2010 में प्रथम पुरस्कार हासिल हुआ था। अंजुरी भर आस पुस्तक में 71 कविताएं शामिल की गई है। प्रोमिला भारद्वाज ने बताया कि उन्होंने यह पुस्तक अपने माता पिता को समर्पित की है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि शीध्र ही उनका अंग्रेजी भाषा का काव्य संकलन प्रकाशित होने जा रहा है। इस पुस्तक के लिए उन्हें रेखा वशिष्ठ, डॉक्टर धर्मपाल कपूर व मुरारी शर्मा का सहयोग भी तथा मार्गदर्शन मिला है। उन्होंने बताया कि वह अपने हमसफर इंजीनियर भारतेंदु भारद्वाज के निरंतर सहयोग को भी नहीं भुला सकती। इसके अलावा उनके पुत्र सम्यन्तक और कौस्तुभ भी इस लेखन में उन्हें प्रोत्साहित करते रहते हैं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व आईपीएस अधिकारी आई. डी. भण्डारी तथा कर्नल जसवंत सिंह चंदेल ने कहा कि प्रोमिला भारद्वाज के पहले और दूसरे दोनों संगठनों को पढ़कर यह अनुभूति होती है कि वह स्त्री की उस दयनीय छवि के प्रभाव से बाहर आ चुकी है। यह कविताएं कवि के व्यक्तिगत सुख-दुख का ब्यौरा नहीं है इनका रचनाकार लगातार अपने समाज और परिवेश के प्रति जागरूक है। प्रोमिला के कविता संसार में विविध स्वरों का समावेश है। इस अवसर पर जिला लेखक संघ के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे प्रोमिला भारद्वाज ने मुख्य अतिथि को शॉल और टोपी भेंट कर सम्मानित भी किया।

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